लोकसभा चुनाव में 4 बड़े चेहरे इस बार चुनाव नहीं लड़ ने पर है सस्पेंस सुषमा-पासवान मैदान में नहीं


लोकसभा चुनाव  नजदीक आते जा रहे है ये से ही भारतीय राजनीति के कुछ बड़े बदलाव एयर कुछ न्य जानने को मिल रहा है  इस बार लोकसभा चुनाव में भारतीय राजनीति के कुछ बड़े चेहरे नजर नहीं आएंगे। राकांपा प्रमुख शरद पवार के चुनाव लड़ने की अटकलें थीं, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। वहीं, रामविलास पासवान, सुषमा स्वराज, उमा भारती जैसे नेता भी चुनाव नहीं लड़ेंगे। जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और द्रमुक के लिए यह पहला चुनाव होगा। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस है
लोकसभा चुनाव में 4 बड़े चेहरे इस बार चुनाव नहीं लड़ ने पर है सस्पेंस सुषमा-पासवान मैदान में नहीं
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुषमा ने कहा कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहती हैं, लेकिन अगर पार्टी फैसला करती है तो वह इस पर विचार करेंगी. उन्होंने कहा कि मेरे स्वास्थ्य की कुछ मर्यादा है.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 2019 में होने वाले आम चुनाव में न लड़ने का ऐलान कर भले ही अपने प्रशंसकों को निराश कर दिया, लेकिन उनके पति इस फैसले से बेहद खुश हैं. सुषमा के पति स्वराज कौशल ने पत्नी के फैसले के बाद सिलसिलेवार कई ट्वीट कर कहा –अब और चुनाव नहीं लड़ने के आपके फैसले के लिए धन्यवाद.

स्वराज कौशल ने कहा कि मुझे याद है एक समय मिल्खा सिंह को भी रुकना पड़ा था. यह दौड़ 1977 से शुरू हुई थी. इसे अब 41 साल हो गए हैं


रामविलास पासवान
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष रामविलास पासवान अपनी परंपरागत सीट पर यह तय नहीं कर पाए हैं कि वो खुद किस्मत आजमाएंगे या फिर अपने भाई एलजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री पशुपति कुमार पारस को चुनाव लड़वाएंगे. अभी भी हाजीपुर सीट को लेकर अटकलें जारी है.
पासवान पहली बार 1969 में विधायक बने। इसके बाद 1977 में वे पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। आठ बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद चुने गए। इन दौरान वे कभी यूपीए तो कभी एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे।


शरद पवार

शरद पवार 14 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बेटी सुप्रिया सुले के लिए छोड़ी। पवार अभी राज्यसभा सदस्य हैं। इस बार उनके माढा से चुनाव लड़ने की अटकलें थीं।

चुनाव नहीं लड़ने का कारण : पवार ने कहा कि परिवार के दो सदस्य यानी सुप्रिया सुले और अजीत पवार के बेटे पार्थ इस बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। यही कारण है कि वे इस बार चुनाव मैदान में नहीं होंगे। उन्होंने कहा था कि परिवार और पार्टी के सदस्य चाहते हैं कि पार्थ (पोता) चुनाव लड़े। मैं भी चाहता हूं कि नई पीढ़ी को राजनीति में आना चाहिए।

लालकृष्ण आडवाणी 

लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। वे सातवें उपप्रधानमंत्री रहे हैं। वे मोरारजी देसाई की सरकार में सूचना मंत्री और अटल सरकार में गृह मंत्री रहे। वे भाजपा की स्थापना से पहले जनसंघ और जनता पार्टी का हिस्सा रहे।

चर्चा में क्यों रहे: आडवाणी राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता रहे हैं। उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा निकाली थी। 1984 में दो सांसदों वाली भाजपा को मुख्य विपक्षी दल बनाने और फिर अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में दो बार सरकार बनवाने में आडवाणी की अहम भूमिका रही है। वे 2009 के चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे।

चुनाव लड़ने पर सस्पेंस क्यों : आडवाणी के इस बार चुनाव लड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है। इसका बड़ा कारण उनकी उम्र (91) बताई जा रही है। वे पांच बार से गुजरात की गांधीनगर सीट से सांसद हैं।




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